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Thursday, September 10, 2015

चोट कहीं और दर्द कहीं.....

(स्केच नंबर १)

ऐ तेज हवाओं!
माना तेरी तो यह फितरत ही है
कि एक सूखे पत्ते को उड़ा देना और पटकना!
मगर अपने इस खिलंदड़ेपन में
बस इतनी सी इंसानियत और जज्बात रखना कि
इस सूखे पत्ते के हालात को देखकर
उस टहनी की आह और ऑसू तो न निकलें!
जिसका यह कभी हिस्सा, लाडला और दुलारा हुआ करता था!

फोटोग्राफ - श्री दिनेश कुमार सिंह द्वारा