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Friday, November 1, 2013

अंतर्मन जो करे प्रकाशित, ऐसी दीप ज्योति जल जाये ।


नहीं कामना हे प्रभु मेरे ,
तेज ज्योति जगमग प्रकाश की,
निखरे छटा प्रभाष पुंज की
जिससे आँखें चुधिया जायें,
उसमें दर्प, घमंड समाये ।

इतना ही प्रकाश मेरे प्रभु !
जीवन में तुम कायम रखना ,
सहज शांत ल्यों दीपक ज्योति ,
सूर्य किरण संयम रख जलती,
स्निग्ध चांदनी प्रकाश पथ देती ।

जो प्रकाश जीवन पथ बिखरे,
चकाचौंध प्रभु! दृष्टि न छाये,
संयम धीरज के रंग निखरे
दर्प, कलुष मन कदापि न आए ।

हे प्रभु!
अंतर्मन जो करे प्रकाशित, 
ऐसी दीप ज्योति जल जाये ।

Wednesday, September 4, 2013

दीप बन जलते रहो तुम

है अँधेरा गहन कितना ,
दीप बन जलते रहो तुम ।
पतझड़ों के दौर हों पर ,
पुष्प बन खिलते रहो तुम ।१।  

                          
कौन कहता है गगन का
विस्तार होता है असीमित ?
हौसला ग़र पास हो तो ,
नाप सकते छोर हो तुम ।२।

क्या असंभव, कल्पना क्या ?
कहते किसे दिन में सितारे ?
जो भी सोचो, घटित हो वह,
सोचकर देखो स्वयं  तुम ।३।

कौन कहता आ नहीं
सकते धरा पर चाँद तारे ?
वे सिमटते मुट्ठियों में ,जो
नभ ऊँचाई  उठ खड़े तुम ।४।

विस्तार इतना ! लहर कितनी !
गंभीर है अति  गर्भ सागर ।
फिर भी जो डुबकी लगाओ,
रत्नमणि निधि पा सको तुम ।५।

श्वेत,श्यामल,देश,मजहब,
भेद कितने , नफरतें सौ  ।
जो समझते मनुजता को ,
बंधु जग को  मानते  तुम ।६।

करतल लकीरों में छिपे हैं,
आगत समय के संकेत हलके ।
पढ़ते हृदय निज चेतना जो
जानते  भवितव्यता तुम ।७।

Wednesday, October 26, 2011

हे दीप-प्रकाश !





हे दीप-प्रकाश!

हे शुभ-प्रकाश!

जीवन का पथ आलोकित

करते तुम, मेरे प्राण-आश
हे दीप प्रकाश

रवि जब विश्रामगमन होता,
शशि जब शाम बहक जाता,
तारे भी आकुल हो उठते,
तम-असुर निगलता जगत को जब,
तुम प्रभु-अवतार ज्योतिमय बन
उद्धार जगत का करते हो।
देते जग को जीवन-प्रभाष,
फैलाकर तव कोमल प्रकाश।
हे दीप प्रकाश।

तव ज्योति नृत्य का दर्शन कर,
जग आनंदित हो उठता है।
तुम समूह बन सजते जो,
घर-घर दीवाली-मय होता है।
तुम बल खाते,नाट्यम करते,
जग-सुख को इतराते बहलाते।
लाते जीवन में स्मित और हास,
बनकर तुम उत्सव प्रकाश।
हे दीप प्रकाश।

हे दीप मेरे!शुभ दीप मेरे!
साँसों-प्राणों की ज्योति मेरे!
तुम हो तो जीवन आलोकित है,
तुम मौन मेरा अस्तित्व व्यथित है।
जलते रहना सदैव प्रिय तुम।
मेरे मनहृदय में आवासित हो
स्निग्ध,शांत,करुणामय,विह्वल,
तेरा यह धवल चिर प्रकाश।
हे दीप प्रकाश।