Saturday, October 1, 2016

बापू तुम अमर बने रहो सदैव, मेरे आत्मा, चिंतन, मन के विश्वासों में....

बापू तुम अमर बने रहो सदैव,
मेरे आत्मा, चिंतन, मन के विश्वासों में....

तुम भारत के,
और भारतीयता के थे वास्तव प्रतीक
सरल, सादगीपूर्ण,
धीरज और संयम से परिपूर्ण
सौहार्द और सद्भावना के प्रतिमूर्ति,
तेरे उछ्वासों में
स्पंदित होती थी आत्मा भारत की
तेरे विश्वासों में ही
रचता, बसता सच्चे भारत का विश्वास
बापू!
तुम भारत के,
और भारतीयता के थे सहज प्रतिबिंब ।

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