Friday, November 1, 2013

अंतर्मन जो करे प्रकाशित, ऐसी दीप ज्योति जल जाये ।


नहीं कामना हे प्रभु मेरे ,
तेज ज्योति जगमग प्रकाश की,
निखरे छटा प्रभाष पुंज की
जिससे आँखें चुधिया जायें,
उसमें दर्प, घमंड समाये ।

इतना ही प्रकाश मेरे प्रभु !
जीवन में तुम कायम रखना ,
सहज शांत ल्यों दीपक ज्योति ,
सूर्य किरण संयम रख जलती,
स्निग्ध चांदनी प्रकाश पथ देती ।

जो प्रकाश जीवन पथ बिखरे,
चकाचौंध प्रभु! दृष्टि न छाये,
संयम धीरज के रंग निखरे
दर्प, कलुष मन कदापि न आए ।

हे प्रभु!
अंतर्मन जो करे प्रकाशित, 
ऐसी दीप ज्योति जल जाये ।

3 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,
    दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ।।

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  2. बढ़िया पोस्ट |दीपावली पर हार्दिक शुभ कामनाएं

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