Saturday, December 10, 2011

-जुगाड़ का खेल व आग के खतरे...


इस संदर्भ में मैं एक वाकया आपसे साझा करना चाहूँगा।बात दो वर्ष पुरानी है जब मैं अपने प्रबंधन की पढ़ाई के सिलसिले में यू.एस.ए में था।अमरीकी लोकनीति व गवर्नेंस के विशेष अध्ययन हेतु हमारी कक्षा, जिसमें हम सभी तकरीबन 25 भारतीय सरकारी अधिकारी शामिल थे, वहाँ के प्रधान सरकारी कार्यालयों के दौरे पर थी व हम सभी वहाँ की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. के एक होटल में रुके थे।वहाँ के स्तर को देखते यह आठ-दस मंजिला एक साधारण सा ही होटल था।हम सभी होटल के तीसरे और चौथे माले पर रुके थे।

एक दिन अचानक सुबह चार बजे होटल के कमरे में लगा फायर अलार्म सक्रिय हो गया व सायरन बजने लगा और हम हड़बड़ाते हुये बिस्तर पर सोते से उठते कि कमरे की कालबेल भी बज उठी व दरवाजे पर होटल स्टाफ यह सूचना दिया कि होटल में कहीं आग लगी है व हम सभी पाँच मिनट के अंदर अपने पासपोर्ट,प्रवास सम्बन्धित जरूरी कागजात,मुद्रा इत्यादि के साथ फायर लिफ्ट का उपयोग करते ग्राउंड फ्लोर पर रिसेप्सन लॉबी में इकट्ठे हो जायें।

जब तक हम सब फायर लिफ्ट तक पहुँचे तब तक धम-धम बूट पटकते फायर ब्रिगेड कमांडो भी फायर स्टेयर केस के रास्ते हमारी फ्लोर पर पहुँच चुके थे।हम सभी घबराये सहमे से, कुछ के साथ छोटे बच्चे भी थे,होटल के रिसेप्सन लॉबी में इकट्ठे हो गये।हम देख सकते थे कि होटल परिसर में चार फायर ब्रिगेड गाड़ियाँ सभी आधुनिक लावलस्कर के साथ तैनात थी।

हम सब हतप्रभ से घटना के बारे में अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे थे कि करीब दस मिनट के अंदर होटल के सिक्युरिटी स्टाफ ने हमें सूचित किया कि तीसरे फ्लोर के एक कमरे में ठहरे अतिथि , जो कि हमारे ही ग्रुप में से ही एक था,द्वारा दूध उबालते हुये कुछ दूध हॉट प्लेट पर गिर गया और जिसके धुयें से स्मोक व फायर डिटेक्सन प्रणाली सक्रिय होकर फायर अलार्म व सुरक्षा सायरन सक्रिय हो गया।होटल स्टाफ ने सभी अतिथियों से हुई असुविधा हेतु खेद प्रकट करते हुये तीसरे फ्लोर के अतिथियों को छोड़कर बाकी सभी को अपने कमरे में वापस लौटने की अनुमति दी।करीब आधे घंटे की गहन जाँच व आग की किसी संभावित आशंका को फायर सेफ्टी कमांडो द्वारा न्यूट्रलाइज करने के उपरांत ही हम बाकी सभी तीसरे फ्लोर के लोगों को भी अपने कमरे में वापस जाने की अनुमति मिली।जिन सज्जन के कमरे में यह आग का हादसा हुआ था उनकी व उनके पत्नीजी की तो कई घंटों तक सिक्युरिटी स्टाफ द्वारा काउन्सिलिंग चलती रही, जो कि उन लोगों के लिये बड़े ही झेंप वाली स्थिति थी।

हम सबमें से कइयों के लिये यह अजीब,हास्यास्पद व कुछ ज्यादा प्रतिक्रियात्मक लग रहा था, किंतु सारी कार्यवाही जिस तत्परता,गम्भीरता व युद्धस्तर पर की गयी,कि एक छोटी सी आग की घटना पर भी आवश्यक कार्यवाही बिना कोई समय गँवाये, घटना के मात्र मिनटों अंदर ही शुरू हो गयी व आधे घंटे के अंदर सुरक्षित सम्पन्न हो गयी, जिससे मैं निश्चय ही बड़ा प्रभावित हुआ और यह हमेशा के लिये मेरे जेहन में बैठ गयी।

जब मैं इस मामूली सी घटना की तुलना कल अपने देश में कोलकाता के बड़े अस्पताल में हुयी आग की दुर्घटना, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गयी,से करता हूँ तो मन भारी शर्म व दुःख के बोझ तले दब जाता है और जब यह पढ़ने को मिलता है कि आग लगने पर भी इस तथाकथित विशाल व अत्याधुनिक अस्पताल में आधे घंटे तक अस्पताल के स्टाफ,सुरक्षा कर्मियों व मरीजों को कोई सिग्नल या अलार्म मिलना तो दूर,कानोंकान पता भी नहीं चलता कि अस्पताल के किसी कोने में भयंकर आग लगी है और तेजी से आग व धुँआ फैल रहा है और उन्हे असहाय मरीजों की जान बचाने का कोई कारगर कदम उठाना चाहिये।जब उन्हे पता भी चलता है तो कोई प्रभावी रोकथाम व सुरक्षा की कार्यवाही, वैसे भी इसकी न तो उन्हें कोई ट्रेनिंग है न ही जानकारी, करने के बजाय बस घबराये व भ्रमित से इधरउधर भागते रहते हैं।यहाँ तक कि पास के ही फायर स्टेशन को भी अस्पताल में आग की सूचना घटना होने के घंटों बाद मिलती है जब तक बहुत देर हो चुकी होती है व कई मरीज तड़पने, साँसघुटने से दम तोड़ चुके होते हैं ,और आगसुरक्षा कर्मचारी जब घटना स्थल पर पहुँचते भी हैं तो बिना उचित साजोसामान के कि वे आग व धुयें में फँसे लोगों को कोई सार्थक मदद पहुँचा सकें। घटना के लगभग चार घंटे उपरांत ही दक्ष फायर कमांडो व बचाव के आवश्यक साजोसामान व उपकरण वहाँ पहुँच पाते हैं किंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी व सैकड़ों लोग दम तोड़ चुके थे।

जैसा कि अखबारों में पढ़ने में मिला कि अस्पताल के बेसमेंट में आग सुरक्षा नियमों की घोर अवहेलना करते हुये कई प्रकार के ज्वलनशील सामानों,गैस सिलिंडरों का स्टोरेज था, जिसपर फायरसुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति भी जतायी थी।यहाँ तक कि इसी तरह की आग की घटना अस्पताल में तीन वर्ष पूर्व भी हुई थी किंतु सौभाग्यवश उस समय किसी हताहत की घटना नहीं हुई इसलिये इसे गम्भीरता से नहीं लिया गया और लापरवाही व आग सुरक्षा नियमों की अवहेलना की यथास्थिति बनी रही।

हमारे देश में यह आग सुरक्षा नियमों की अवहेलना के कारण हुई आग की घटना व इसमें सैकड़ो जान जाने की यह कोई नई घटना नहीं है। कई वर्षों पहले दिल्ली में हुई उपहार सिनेमा हाल की घटना, चंडीगढ़ में बच्चों के स्कूल उत्सव में पंडाल में आग की घटना व सैकड़ों मासूम बच्चों की मौत, उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक मेले के पंडाल में लगी आग व सैकड़ों की जलकर मौत,कोलकाता में कई आग के हादसे, एक साल पहले बंगलौर के एक आईटी कम्पनी में लगी आग व उसमें कई लोगों की मौत,  हमारी ट्रेनों में अकसर होने वाली आग की घटनायें व उसमें होने वाली कई मौतें, जैसे कई दुखद,दुर्भाग्यपूर्ण व आँख खोलने वाले हादसे पहले हो चुके हैं और प्रायः ही घटते रहते हैं,किंतु हमारी आँख कहाँ खुलती है ? कुछ दिन तक तो हुई इस दुःखद घटना की चर्चा होती है,हम शोक जताते हैं, फिर भी सारे सुरक्षा नियमों-तरीकों को ताक पर रखते,हमारा बस वहीं जुगाड़ु तौर-तरीकों वाला Business as Usual चालू रहता है।

क्षमा करें मेरा विचार मात्र अपने देश और यहाँ अपनाये जाने वाले तौर-तरीकों की आलोचना व अमरीका या पश्चिमी देशों को महिमामंडित करना नहीं है।पर मन में इस बात का भारी क्षोभ अवश्य है कि एक तरफ जब हम विकसित देशों की देखादेखी आधुनिक सुख-सुविधा वाली बड़ी-बड़ी इमारतें व भवन (जिनकी ग्लास पैनल्ड खिड़की रहित बाहरी दीवारें,केंद्रीकृत वातानुकूलन और उनकी चमक-दमक देखते ही बनता है) तो बना लेते हैं किंतु उनके लिये आवश्यक आग सुरक्षा नियमों की भारी उपेक्षा करते हैं।

ऐसा नहीं कि आवश्यक सुरक्षा नियमों व मानकों का हमारे देश में कोई अभाव है अथवा वे दोयम दर्जे के हैं, किंतु स्वयं के इस क्षेत्र में लम्बे तकनीकी अनुभव के आधार पर बड़े दुःख के साथ कहना चाहता हूँ कि भवन निर्माण व इसके रखरखाव से संबंधित अभियंताओं व प्रबंधकों/मालिकों द्वारा आग सुरक्षा नियमों से संबन्धित आवश्यक उपायों व उपकरणों की भारी उपेक्षा जान-बूझ कर की जाती है,उनपर किसी तरह का खर्चा उन्हें फालतू का खर्च महसूस होता है। यदि कोई तकनीकी जानकार इंजिनियर या सलाहकार इन उपकरणों व प्रणालियों को सुनिश्चित करने का आग्रह करता है तो उसे काम की प्रगति में अनावश्यक रोड़ा डालने वाला समझकर उसे व उसके सुझाव को दरकिनार कर दिया जाता है।

यदि कहीं ये उपकरण लगे भी हैं तो उनके रखरखाव की घोर उपेक्षा के कारण प्रायः खराब होते हैं व जरूरत पड़ने पर काम ही नहीं करते।हमारा आग सुरक्षा विभाग भी इन आधुनिक ,विशाल व जटिल प्रणालियों वाले भवनों में आग के खतरे से निपटने हेतु आवश्यक व आधुनिक सुविधा से विहीन व दक्षता से रहित हैं।

भविष्य में यदि इस तरह कि आग लगने की दुखद घटनाओं से बचना है तो  हमें भवनों में आग से सुरक्षा के तौर-तरीकों ,आवश्यक उपकरणों व प्रणालियों और इनके रखरखाव के आवश्यक नियमों को मानकों के अनुसार कड़ाई से पालन करना होगा , बजाय कि  इनके प्रति उपेक्षा बरतने व मात्र जुगाड़ू तौर-तरीकों को अपनाने के, जो कि वर्तमान में हो रहा है।

2 comments:

  1. जान जाने से भली है अति प्रतिक्रिया।

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